सचिन तेंदुलकर की आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' का बुधवार को मुंबई में विमोचन हुआ.
सचिन
ने आत्मकथा की सबसे पहली प्रति अपनी मां रजनी को दी. सचिन ने ट्वीट किया,
"अपनी क़िताब की पहली प्रति अपनी मां को दी. उनके चेहरे पर गौरव देखना
बेशकीमती लम्हा था!"सचिन ने किताब की एक प्रति अपने गुरु रमाकांच आचरेकर को भी भेंट की.
नारंगी टी शर्ट
अंजलि ने बताया, "सचिन ने कहा कि लड़की के लिए मेरे घर आना मुश्किल होगा. तुम पत्रकार बनकर आ सकती हो. इसलिए मैं पत्रकार बनकर पहली बार सचिन के घर गई."इस मौकै पर सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, रवि शास्त्री, सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण समेत कई दिग्गज हस्तियां भी मौजूद थीं.
सचिन से प्रभावित
इन खिलाड़ियों ने सचिन से जुड़े कई सुनहरे पलों का याद किया.सचिन ने अपनी आत्मकथा में 32वें पन्ने पर पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर का जिक्र किया है.
वेंगसरकर ने कहा, "मैं तब भारतीय टीम का कप्तान था. वासु परांजपे ने मुझे सचिन का खेल देखने को कहा. तब वह 15 साल के थे. मैंने कपिल देव और अरशद अयूब जैसे गेंदबाज़ों से सचिन को गेंदबाज़ी कराई. मैं बहुत प्रभावित था. फिर मैंने चयनकर्ताओं से बात की और कहा कि सचिन को कम से कम 15 खिलाड़ियों में चुन लिया जाना चाहिए."
सिडनी का पराक्रम
सिडनी टेस्ट में सचिन के शतक को याद करते हुए शास्त्री ने कहा, "18 साल की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन आक्रमण के सामने शतक लगाते हुए देखा. ऑस्ट्रेलिया के वॉ बंधुओं समेत कई खिलाड़ी उनके ख़िलाफ़ छींटाकशी कर रहे थे. सचिन गुस्से में थे, लेकिन मैंने उनसे कहा कि तुम्हें मुंह से कुछ नहीं कहना है, बैट से जवाब देना है. और फिर उन्होंने 148 रन बनाए."
मराठी में बातें
राहुल द्रविड़ ने यह भी बताया कि जब वह और सचिन दोनों साथ बल्लेबाज़ी कर रहे होते थे तो मराठी में काफी बातें किया करते थे.
'सचिन को पसंद थी ओपनिंग'
बल्लेबाज़ी क्रम के बारे में विवाद पर गांगुली ने हंसते हुए कहा, "सचिन से पूछा गया था कि चौथे नंबर पर बल्लेबाज़ी करोगे, सचिन का जवाब था- मुझे जिस क्रम पर बल्लेबाज़ी करने को कहोगे, करूंगा- लेकिन मेरी पसंद पूछोगे, तो वो ओपनिंग ही है."
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