दुनिया भर में शानदार और बेहतरीन कारें, मोटरसाइकिल बनाने वाली कम्पनी का पूरा नाम बवेरियन मोटर वर्क्स है. जिसे संक्षिप्त रूप से बीएमडब्ल्यू के नाम से जाना जाता है. यह कम्पनी पहले-पहल सिर्फ़ इंजन बनाती थी. बीते 13 अगस्त को इस कंपनी ने अपने 96 साल पूरे किए है. 13 अगस्त 1918 को ही यह कंपनी पब्लिक कम्पनी बनी थी.
राप मोटोरेनवर्के को फिर से गठित करने के बाद बीएमडब्ल्यू एक नई कंपनी बनी. पहला विश्व युद्ध खत्म होने के बाद कंपनी के हवाई जहाज इंजिन बनाने पर रोक लगा दी गई. फिर 1923 में इस कंपनी ने मोटरसाइकिल बनाना शुरू किया. 1928-29 में फिर कारों का बनना शुरू हुआ.
बीएमडब्ल्यू की सबसे पहली सफल और सड़क पर चलाई गई कार डिक्सी थी. इसे लाइसेंस बर्मिंघम की कंपनी ऑस्टिन मोटर ने दिया था. इस डिजाइन को बनाने के लिए बीएमडब्ल्यू ने दो डिजाइनरों को बुलाया, माक्स फ्रिट्ज और गॉटहिल्फ डुर्रेनवैष्टर. ये दोनों श्टुटगार्ट में डाइमलर बेन्ज के कर्मचारी थे.
1998 में बीएमडब्ल्यू ने रोल्स रॉयस खरीद ली. बीएमडब्ल्यू का पहला बढ़िया इंजिन हवाई जहाज का था. इला इनलाइन सिक्स लिक्विड कूल इंजिन 1918 में बनाया गया था और ऊंचाई पर उड़ने के लिए इसे बहुत अच्छा माना जाता था.
बीएमडब्ल्यू की सबसे पहली सफल और सड़क पर चलाई गई कार डिक्सी थी. इसे लाइसेंस बर्मिंघम की कंपनी ऑस्टिन मोटर ने दिया था. इस डिजाइन को बनाने के लिए बीएमडब्ल्यू ने दो डिजाइनरों को बुलाया, माक्स फ्रिट्ज और गॉटहिल्फ डुर्रेनवैष्टर. ये दोनों श्टुटगार्ट में डाइमलर बेन्ज के कर्मचारी थे.
1998 में बीएमडब्ल्यू ने रोल्स रॉयस खरीद ली. बीएमडब्ल्यू का पहला बढ़िया इंजिन हवाई जहाज का था. इला इनलाइन सिक्स लिक्विड कूल इंजिन 1918 में बनाया गया था और ऊंचाई पर उड़ने के लिए इसे बहुत अच्छा माना जाता था.
1. पहला पहला पोर्शे...
वह साल था 1898, जब 23 साल के फर्डीनांड पोर्शे ने इस कार को तैयार किया. इलेक्ट्रिक कार. नाम रखा पी1, अपने नाम पोर्शे परः पोर्शे 1. तीसरी सदी में प्रवेश के बाद भी कार की चमक देखिए. कहते हैं बग्घीनुमा यह गाड़ी 25 किलोमीटर की रफ्तार से कुलांचे भर सकती थी.
3. बिंदास बीटल...
साल था 1937 और फोक्सवागन ने बनाया बीटल का प्रोटोटाइप 'केफर'. कहते हैं कि इसकी डिजाइनिंग में पोर्शे के संस्थापक फर्डीनांड पोर्शे ने भी अहम भूमिका निभाई. लक्ष्य था, हर किसी को कार मिले. 2003 तक इसका उत्पादन हुआ और कंपनी ने दो करोड़ से ज्यादा बीटल कारें बेचीं.
4. पूर्वी जर्मनी की कार...
जर्मनी अलग हुआ तो कार कंपनियों का नुकसान हुआ. पूर्वी जर्मनी में ट्राबांट कार बनी. यह 1958 का मॉडल है. यह कार भी आम लोगों की कार के रूप में लोकप्रिय हुई और इसे प्यार से कहा गया "ट्राबी".
5. शान की पहचान...
जर्मनी से बाहर अमेरिका कार का गढ़ बना. फोर्ड ने 1972 में टिन लिजी कार तैयार की, जो उस वक्त दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाली कार बन गई. अमेरिका में 1908 से 1927 के बीच कोई डेढ़ करोड़ कारें बन गई थीं.
6. हवा के साथ...
14 नवंबर, 1945. दूसरे विश्व युद्ध के बावजूद जर्मनी की डायमलर बेंज कंपनी एक स्पोर्ट्स कार तैयार करने में लगी थी. मर्सिडीज के इस मॉ़डल की रफ्तार उस जमाने में भी 450 किलोमीटर प्रति घंटा थी. ये पांच टीले दिख रहे हैं, जिनमें चार पहिए हैं और पांचवां ड्राइवर के बैठने की जगह.
7. फ्रांस की देवी...
सिट्रोएन का फ्रांसीसी भाषा में मतलब होता है देवी. यह देश की सबसे बड़ी कार कंपनी है. यह मॉडल 1955-1975 के बीच बनता था और इस तरह की कारें तो उस वक्त की फिल्मों में खूब दिखाई देती थीं.
8. जर्मन स्पोर्ट्स कार...
पोर्शे 911 रफ्तार और शान की पहचान बन गई. जर्मनी की इस कार ने अपना अलग बाजार बनाया. पहली बार इसे 1963 में फ्रैंकफर्ट कार मेले में दिखाया गया. बाद में यह पूरी दुनिया में मशहूर हुई.
9. और तेज, और आगे...
फोक्सवागन ने भी स्पोर्ट्स कार पर हाथ आजमाया और साल 2001 में कुछ इस तरह की "डब्ल्यू 12 कूपे" तैयार हुई. इटली में इसकी टेस्टिंग हुई और 295 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत रफ्तार से कार ने दौड़ लगाई.
10. तेज लेकिन किफायती...
जर्मनी की एक और मशहूर कार कंपनी बीएमडब्ल्यू ने अपने आई8 मॉडल को 2009 में फ्रैंकफर्ट मोटर शो में पेश किया. इस हाइब्रिड कार को ईंधन बचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
This Article is curated from: dw
तो भैया कैसी रही कारों की दुनिया और कारोबार की कहानी. गर अच्छी लगी हो तो इन्हें साझा करें. बस इतना ही कहना है.
No comments:
Post a Comment