Monday, 29 May 2017

लेबर रूम में पहुंचते ही ऐसा क्या होता है कि नॉर्मल डिलीवरी बदल जाती है सिज़ेरियन डिलीवरी में?

मां बनना एक औरत के लिए ज़िन्दगी का बेहद ख़ूबसूरत पड़ाव होता है, लेकिन ये ख़ूबसूरती तभी तक अच्छी लगती है, जब तक कि उसे बच्चा जनने के लिए, ऑपरेशन थियेटर से होकर न गुज़रना पड़े.

दर्द भरी ख़ुशी



Source: Whattoexpect

मेडिकल साइंस का मानना है कि बच्चा जनते वक़्त एक महिला को, हड्डियों के टूटने जितना दर्द होता है, लेकिन ये दर्द एक महिला अपने बच्चे को, सुरक्षित पैदा करने के लिए सहती है. उस वक़्त तो ये दर्द कुछ घंटों के लिए होता है, लेकिन जब एक महिला का डिलीवरी के वक़्त, सिज़ेरियन ऑपरेशन से पाला पड़ता है, तब ये दर्द स्थाई हो जाता है. बेशक मां बनने पर हर औरत ख़ुश होती है, लेकिन इस ख़ुशी के साथ मिला दर्द उसके साथ उम्र भर रहता है.
सिज़ेरियन या C-Section Delivery में महिला के गर्भाशय में चीरा लगाकर बच्चे को बाहर निकला जाता है, जिसके कारण भविष्य में महिला को कई शारीरिक समस्याओं से जूझना पड़ता है.

सिज़ेरियन डिलीवरी क्यों?



Source: Mammole

सामान्यतः जब Vaginal Delivery से बच्चा जनने से, महिला या शिशु के स्वास्थ्य पर असर पड़ता हो, तब सिज़ेरियन डिलीवरी के लिए Doctor, Recommend करते हैं. बहुत Rare केस में सिज़ेरियन डिलीवरी की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन अब अस्पतालों में नया Trend चलाया है. अब महिला या शिशु की जान बचाने के लिए नहीं, पैसा कमाने के लिए C-Section Delivery कराई जाती है. सरकारी अस्पतालों में तो नॉर्मल डिलीवरी की गुंजाइश भी होती है, लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में इसकी सम्भावना बेहद कम होती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट



Source: WHO

1992-93 में विश्व स्वस्थ्य संगठन के एक सर्वे के अनुसार, तब 2.5 प्रतिशत केस ही ऐसे होते थे, जिनमें सिज़ेरियन डिलीवरी की ज़रुरत पड़ती थी. 2005-06 में ये आंकड़ा 8.5 प्रतिशत रहा और 2014-15 में ये आंकड़ा बढ़कर 15.4 प्रतिशत हो गया. ये महज आंकड़े हैं, हक़ीकत इससे कहीं ज़्यादा है.
National Family Health Survey-4 (2015-16) के अनुसार सरकारी अस्पतालों में केवल 11.9% मामले ऐसे होते हैं जिनमें C-Sections के माध्यम से डिलीवरी कराने की ज़रूरत पड़ती है, वहीं प्राइवेट अस्पतालों में 40.9% केसेज़ ऐसे होते हैं जिनमें सिज़ेरियन डिलीवरी कराई जाती है.
आंकड़ों से स्पष्ट है कि Caesarean Sections Delivery की दर सरकारी अस्पतालों की तुलना में, प्राइवेट अस्पतालों में, तीन गुणे से भी ज़्यादा है. 
ये सरकारी आंकड़े दो साल पहले के हैं. बीते दो वर्षों में इन आंकड़ों में इज़ाफ़ा भी हुआ होगा.
आंकड़े कभी Accurate नहीं होते हैं. C-Section के मामले इन आंकड़ों से कहीं अधिक होते हैं. प्राइवेट अस्पतालों में गर्भवती महिला को भर्ती कराने सीधा मतलब है, सीज़ेरियन डिलीवरी के माध्यम से ही बच्चा पैदा होगा. अफ़सोस हमारे सरकार के पास ऐसा कोई प्रभावी कानून नहीं है जिससे प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर लगाम कसा जा सके.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि किसी भी देश में, सिज़ेरियन ऑपरेशन के माध्यम से डिलीवरी 10 से 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन भारत में ये आंकड़े कब के पार हो चुके हैं.

सिज़ेरियन डिलीवरी के केसेज़ क्यों बढ़ रहे हैं?



Source: Babycenter

अधिकांश Gynecologist का मानना है कि भारत में इसकी वजह है,अव्यवस्थित जीवनशैली, मोटापा, डायबटीज़, दुबलापन और गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण का न मिल पाना. कुछ Gynecologist का ये भी मानना है कि अधिकतर भारतीय महिलाएं, गर्भावस्था के दौरान, शारीरिक व्यायाम न के बराबर करती हैं, इसलिए भी नॉर्मल डिलीवरी के वक़्त Complications आते हैं.

डर का फ़ायदा उठाते हैं अस्पताल



Source: Oowomaniya

उत्तर प्रदेश में सिद्धार्थ नगर के एक सज्जन ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि वे एक प्राइवेट हॉस्पिटल में अपने पत्नी को नियमित चेकिंग के लिए ले जाते थे. डॉक्टर का कहना था नॉर्मल डिलीवरी से बच्चा पैदा हो जाएगा लेकिन जब उनकी पत्नी को दर्द बढ़ा और डिलीवरी कराने के लिए लेबर रूम में उन्हें ले जाया गया, तब डॉक्टर ने उनसे कहा कि मामला क्रिटिकल हो गया है, ऑपरेशन करना पड़ेगा. अगर ऑपरेशन नहीं हुआ तो जच्चा-बच्चा दोनों को बचाना मुश्किल हो जायेगा. उन्होंने बताया कि, 'मैं डर गया. मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था. मैंने कहा ऑपरेशन कर दीजिये लेकिन मेरे पत्नी और बच्चे को बचा लीजिये.' बाद में मुझे लगा मेरे इसी घबराहट का फ़ायदा हॉस्पिटल ने उठाया. पहले कहा कि सिर्फ 3,500 रुपये आपको जमा करने होंगे लेकिन 40,000 का बिल हाथों में थमा दिया गया. अचानक आदमी कहां से इतने पैसों का इंतज़ाम करे?
दिल्ली में रहने वाली स्मिता(बदला हुआ नाम) को ऑपरेशन से डर लगता था. वे अपने बच्चे को प्राकृतिक तरीके जन्म देना चाहती थीं. डिलीवरी से एक दिन पहले तक डॉक्टर कह रहे थे कि नॉर्मल डिलीवरी से बच्चा पैदा होगा. जैसे ही दर्द बढ़ा और उन्हें लेबर रूम में ले जाया गया, डाक्टर ने कहा ऑपरेशन करना पड़ेगा. अचानक से ऑपरेशन की बात सुनकर स्मिता घबरा गईं. वे इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थीं.उनके पति ऑटो रिक्शा चलाते हैं उन्हें तुरंत से पैसे जुटाने के लिए भी बहुत परेशान होना पड़ा.

सिज़ेरियन डिलीवरी पर क्या कहती हैं महिलाएं?



Source: Dailymail

आरती बताती हैं कि ऑपरेशन से पहले कितना भी वज़न क्यों न हो, वे उठा लेती थीं. लेकिन अब वे ज़्यादा वज़न उठाती हैं तो उन्हें तक़लीफ़ होती है.
कुछ ऐसा ही ग़ाज़ियाबाद में रहने वाली सीमा का कहना है. उन्हें कभी अस्थमा और सिर दर्द की समस्या नहीं थी लेकिन ऑपरेशन के बाद उन्हें इसकी तकलीफ़ बढ़ गई.
36 वर्षीया साक्षी बताती हैं कि ऑपरेशन के पहले सब ठीक था लेकिन ऑपरेशन के बाद घुटने और सांस की तकलीफ़ बढ़ गई. पूछताछ के दौरान पता चला कि लगभग ऐसा ही अनुभव उन सभी महिलाओं का है जो सिज़ेरियन ऑपरेशन की प्रक्रिया से गुज़री हैं.

मुश्किलें जो सिज़ेरियन डिलीवरी के बाद बढ़ जाती हैं



Source: Bebac

सिज़ेरियन ऑपरेशन के बाद Stitches, Breast Infection का होना तो नॉर्मल है, लेकिन Excess Bleeding की वजह से महिला शारीरिक रूप से कमज़ोर हो जाती है. अगर युरिनल इन्फ़ेक्शन हो जाये तो महीनों तक ठीक नहीं होता. कुछ रिसर्च में पता चला है कि ऑपरेशन के बाद महिला महीनों तक सामान्य नहीं हो पाती. नॉर्मल डिलीवरी को पैसों के चक्कर में सीज़ेरियन डिलीवरी में बदलने वाले अस्पताल और चिकित्सक कभी ये नहीं सोचते कि, उनकी वजह से एक महिला को कितना परेशान होना पड़ता है.

बच्चे को होने वाली परेशानियां



Source: Doulas

चिकित्सकों का मानना है सिज़ेरियन डिलीवरी से होने वाले बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य बच्चों से कम होती है. हालांकि इसके अपवाद भी होते हैं. सर्ज़री से होने वाले बच्चों में अस्थमा, ब्रोन काईटिस और एलर्जी होने की संभावना सामान्य बच्चों से ज़्यादा होती है.
ऑपरेशन के दौरान कई बार बच्चे के मस्तिष्क में गंभीर चोटें आ जाती हैं जो सेरिब्रल पैल्सि जैसी गंभीर बीमारी को जन्म देती है जिसमें बच्चा मानसिक रूप से अपंग हो जाता है.

प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी



Source: Cbronline

सिज़ेरियन डिलीवरी का चलन सिर्फ़ शहरों तक सीमित नहीं है. दूर-दराज के ग्रामीण इलाक़ों और कस्बों में भी बहुत तेज़ी से प्राइवेट नर्सिंग होम्स खुल रहे हैं. सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था और संख्या में कमी के चलते लोगों को मजबूर होकर, प्राइवेट नर्सिंग होम्स की ओर जाना पड़ता है, जहां उनका आर्थिक शोषण होता है. एक सामान्य से ऑपरेशन के लिए, 45 से 50 हज़ार रुपये, पेशेंट को खर्च करने पड़ते है. कई बार इससे ज़्यादा भी पैसे अस्पताल वाले ऐंठ लेते हैं. जान का खतरा अलग से बना रहता है. आमतौर पर सिज़ेरियन डिलीवरी करने से पहले महिला के परिवार से, एक डॉक्यूमेंट पर साइन करा लिया जाता है जिसमें लिखा होता है, अगर ऑपरेशन के दौरान पेशेंट की मौत हो जाए तो हॉस्पिटल की कोई ज़िम्मेदारी नहीं होगी. अगर सरकारी अस्पतालों की संख्या बढ़ जाये और उन्हें सुविधा संपन्न कर दिया जाए तो शायद सिज़ेरियन डिलीवरी के मामले घट जाएं.

अस्पताल जनसेवा है या बिज़नेस इंडस्ट्री?




Bangalore Water Supply Vs. A. Rajappa(AIR1978) केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार कहा भी था कि हॉस्पिटल, एक इंडस्ट्री है. अब इंडस्ट्री तो बेनिफ़िट के लिए कुछ भी करेगी.
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत प्राइवेट हॉस्पिटल्स में C-Section डिलीवरी कराई जाती है. इस रिपोर्ट को सच न मानें, तो अपने आस-पास नज़रें दौड़ाएं, लोग वास्तविक स्थिति बता देंगे.
प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी शहर और गांव में, एक जैसी ही है. कोई ऐसा प्रभावी कानून राज्य और केंद्र सरकार दोनों ने नहीं बनाया है, जिससे इनकी मनमानी पर रोक लग सके. ये अस्पताल इलाज करें न करें, बीमार ज़रूर कर देते हैं. महिला को होने वाली मुश्किलों की ओर किसका ध्यान जाए, इंडस्ट्री है वो रुकनी नहीं चाहिए.
पैसे लूटने के नए बहाने मिलें है तो लूटना जारी है. सरकार न जाने क्यों इतनी निश्चिंत हैं कि अस्पतालों की मनमानी उसे नहीं दिखती.स्वस्थ्य संगठन इस पर चाहे जितना चिंता क्यों न जताएं जब तक सरकार द्वारा कुशल नियामक तय नहीं किये जायेंगे, तब तक अस्पतालों के शोषण की प्रवृत्ति ज़ारी रहेगी और प्रसूताओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ होता रहेगा.
Feature Image Source: Darkroom

Monday, 15 May 2017

लंबी उम्र के लिए आदमियों को क्या चाहिए, बता रही है ये नई, अजीब और आश्चर्यजनक रिसर्च!

अपने आपको स्वस्थ रखने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते. कई लोग अपना पसंदीदा खाना छोड़ देते हैं, हेल्दी लाइफ़स्टाइल के लिए लोग जिम, योग, मेडिटेशन तक का सहारा लेते हैं. लेकिन भागती-दौड़ती लाइफ़ में लंबे समय के लिए एक अनुशासित जीवन बिताना थोड़ा मुश्किल होता है. ऐसे में लंबी और खुशहाल ज़िंदगी कई लोगों के लिए एक चुनौती बनी हुई है.
हाल ही में मेडिकल डेली की एक रिसर्च में ये सामने आया है कि अगर आप ये काम करते हैं, तो एक हेल्दी लाइफ़स्टाइल जी सकते हैं. जिन चीज़ों को करने के लिए इस रिसर्च में कहा गया है, वो जानने के बाद हो सकता है आपको बड़ी हंसी या बहुत गुस्सा आये. लेकिन माफ़ करना भैय्या, ऐसा हम नहीं, रिसर्च कह रही है.

1. Breasts को घूरना


Source: ShutterStock
ये भले ही महिलाओं को बेहद असहज करने वाली बात हो, लेकिन एक स्टडी से सामने आया है कि Breasts को देखने पर पुरुषों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और ये पॉज़िटिव ऊर्जा, लोगों की ज़िन्दगी बेहतर करने के काम आती है. पॉजिटिव ऊर्जा किस हद तक लोगों की ज़िंदगी प्रभावित कर सकती है इसकी बानगी आज से कुछ साल पहले देखने को मिली थी. 2012 में हुई एक स्टडी में एक अस्पताल के दिल के मरीज़ों को सुबह-सुबह कुछ सकारात्मक लिखने को कहा गया था. ऐसा रोज़ करने के कुछ ही दिनों बाद ये मरीज़ मानसिक और शारीरिक रुप से बेहतर महसूस कर रहे थे. वहीं ऐसा ही एक प्रयोग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ों के लिए भी कारगर साबित हुआ था.

2. सेक्स


BMJ की एक स्टडी के अनुसार, सेक्स आपकी लाइफ़स्टाइल के लिए अच्छा और ज़रुरी ऑप्शन है. ये आपको कैंसर से बचाता है, आपके दिल को स्वस्थ रखता है, इससे तनाव कम होता है और सेक्स के बाद नींद भी अच्छी आती है. एक रिसर्च के अनुसार, नियमित Orgasms आपकी ज़िन्दगी को तीन सालों से आठ सालों तक बढ़ा सकता है.

3. शादी


Source: Youthkiawaaz
आज न्यूक्लियर होते परिवारों के ज़माने में ये बात भले अजीब लगे, लेकिन ये सच है कि शादीशुदा लोग सिंगल लोगों की तुलना में कहीं ज़्यादा जीते हैं. कहीं न कहीं, इसका श्रेय शादी होने के बाद लोगों की लाइफ़स्टाइल में आने वाले बदलाव को दिया जा सकता है. ख़ास बात ये है कि 25 साल के बाद होने वाली शादियों को ही आपकी ज़िंदगी के लिए बेहतर माना गया है क्योंकि अक्सर इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते लोगों के शादी से जुड़े फै़सले परिपक्व होते हैं.

4. बच्चे पैदा करें

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Source: Fankids
शादी हो गई है, तो ज़ाहिर है बच्चे भी होंगे. सुनने में ये भले ही ज़िम्मेदारी का पहाड़ लगे, लेकिन एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ के एक जर्नल में दिलचस्प तुलना सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, 60 की उम्र वाले सिंगल लोगों की तुलना में बाल-बच्चे वाले लोगों की जीने की संभावना दो साल अधिक होती है. वहीं शादीशुदा महिलाओं में यही सीमा डेढ़ साल अधिक बढ़ जाती है. माना जाता है कि बच्चे होने पर लोग अधिक ज़िम्मेदार हो जाते हैं और अपनी लाइफ़स्टाइल और खान-पान को लेकर गंभीरता बरतने के चलते ज़्यादा लंबा जीते हैं. वहीं 80 साल के सिंगल लोगों की तुलना में, बाल-बच्चों वाले लोगों के जीने की संभावना में 8 महीने की बढ़ोतरी देखी गई है.

5. ज़िम्मेदारी संभालिए


Source: TheUnboundedspirit
जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी ने अपनी एक दिलचस्प रिसर्च से साबित किया कि जिन लोगों के पास ज़िम्मेदारियां होती हैं, वे बाकी लोगों की तुलना में ज़्यादा जीते हैं.  इस रिसर्च में एक नर्सिंग होम में वृद्ध लोगों को एक पौधे की ज़िम्मेदारी दी गई थी. रिसर्च में सामने आया कि जिन लोगों ने पौधे की अच्छी देखभाल की, वे लोग दूसरे लोगों की तुलना में ज़्यादा सतर्क, सोशल और सकारात्मक पाए गए.

6. बढ़ता वज़न अच्छा है


Source: Ikarmik
शादी, बच्चे और नौकरी के दबाव में अक्सर, पुरुषों के वज़न में बढ़ोतरी देखने को मिलती है. अपनी फ़िटनेस को लेकर फ़िक्रमंद लोगों के लिए ये भले ही परेशानी का सबब हो, लेकिन ये आपकी सेहत के लिए उतना बुरा नहीं जितना आप सोच रहे हैं.
दरअसल How Men Age नाम की इस किताब में ये दावा किया गया है कि भरे हुए शरीर के लोगों को दिल का दौरा पड़ने या प्रोस्टेट कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है. एक लेखक का ये भी दावा है कि वज़न बढ़ने के बाद कई पुरुष, महिलाओं के लिए आकर्षक हो जाते हैं. हां अत्यधिक वज़न आपके लिए दिक्कतें पैदा कर सकता है
ये तरीके सुनकर आप भले ही मन ही मन खुश हो रहे हों, लेकिन ये ध्यान जरुर रखिएगा कि ज़िंदगी में चीज़ों को लेकर बैलेंस बनाए रखना बेहद ज़रूरी है. 
Source: Metro

बेड के नीचे जो आखरी नोट छुपाया था, उसे निकाल लो, इस साइट पर 1 करोड़ में बिक रहा है 500 का पुराना नोट

नोटबंदी का नाम लेते ही दिमाग़ में पुराने 500 और 1000 के नोट घूमने लगते हैं. याद आने लगता है कि कैसे झगड़-झगड़ कर हमने बैंक में इन नोटों को जमा किया था. वैसा सपनों के अलावा 500 के नोट अब कहीं और भी नज़र आ रहे हैं.





eBay.in और eBay.com पर 500 के नोट सेल पर हैं और इनकी ख़ासियत की वजह से इनकी कीमत 1 करोड़ तक पहुंच गयी है. eBay की तरह ही बाकी कई कमर्शियल साइट्स पर ये 500 के नोट करोड़ों में बिकने शुरू हो गए हैं. इतनी ऊंची कीमत की वजह इनके ख़ास नंबर का होना है. 



अगर 500 के नोट पर 786 है, तो इसकी कीमत सबसे ऊंची है. और भी नोट हैं, जैसे जिनके सीरियल नम्बर में 420 या 1234 आ रहा हो, उनकी भी अच्छी-खासी बोली लग रही है.



इसके अलावा अब बंद हो चुके 1 और 2 रुपये और 10 के पुराने नोट भी लाखों-करोड़ों में मिलते हैं.
अगर आपके पास भी इन नोटों जैसे ख़ास इक्का-दुक्का 500 के नोट बचे हुए हैं, तो अभी राईट टाइम है बाबा, ऐसी साइट्स पर डाल दो!

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WannaCry Ransomware है दुनिया का सबसे बड़ा साइबर हमला, कई देशों के लोग दे रहे हैं फिरौती

इस शुक्रवार को दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा साइबर हमला हुआ है. इस खतरनाक साइबर हमले ने कई देशों को नुकसान पहुंचाया है, जिनमें सबसे प्रमुख रूस है.
वॉनाक्राय रैनसमवेयर WannaCry या WanaCrypt0r 2.0 एक रैनसमवेयर मैलवेयर टूल है. इसी महीने, दुनिया भर में एक रैनसमवेयर हमला हुआ है. इस साइबर हमले के बाद कंप्यूटरों ने काम करना बंद कर दिया. ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, रूस, स्पेन, इटली, वियतनाम समेत कई अन्य देशों में रेनसमवेयर साइबर हमले की खबरें आयी हैं. भारत भी इन हमलों से अछूता नहीं है. इस हमले से निपटने के लिए कई देशों के लोगों को फ़िरौतियां तक चुकानी पड़ी हैं.

क्या है ये रैनसमवेयर?


आमतौर पर कई Malware, जिन्हें हम वायरस भी कहते हैं, आपके कंप्यूटर में गलत तरीके से घुस जाते हैं. अक्सर इनका उद्देश्य या तो आपके कंप्यूटर के डाटा को चुराना होता है या फिर उसे मिटाना. लेकिन रैनसमवेयर आपके सिस्टम में घुसकर फ़ाइल्स को Encrypt कर देता है, यानि कंप्यूटर की साधारण भाषा को कोड में तब्दील कर देता है. यूज़र तब तक अपने सिस्टम के डाटा तक नहीं पहुंच पाता, जब तक कि वह इसे ‘अनलॉक' करने के लिए रैनसम यानी फिरौती नहीं देता. ये मालवेयर ईमेल के ज़रिए फैलता है.

फ़िरौती देने के बाद भी कई बार नहीं ठीक होता सिस्टम

सिक्योरिटी विशेषज्ञों का कहना है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि पेमेंट करने के बाद आपका सिस्टम ठीक हो जाएगा या आपको फ़ाइलों को एक्सेस करने का अधिकार मिल जाएगा. कुछ Ransomware जो इन फ़ाइलों को Corrupt करते हैं, वे कुछ दिनों बाद फ़िर पैसों की मांग करने लगते हैं और फ़ाइल्स डिलीट करने की धमकी भी देते हैं.

एक गलती से रुका दुनिया का सबसे बड़ा साइबर अटैक


इस रैनसमवेयर को रोकने का श्रेय 22 साल के एक साइबर एक्सपर्ट को जाता है. महज 700 रुपये में इस रिसर्चर ने गलती से इस मालवेयर को रोक दिया. इस रैनसमवेयर में इस्तेमाल होने वाले डोमेन नेम का रेजिस्ट्रेशन करने के बाद इसका प्रसार अपने आप रुक गया.
MalwareTechBlog के ट्विटर यूज़रनेम वाले इस शख़्स ने लिखा, ‘मैं ये मानता हूं कि डोमेन रजिस्टर करते वक्त मुझे पता नहीं था कि इससे मालवेयर को फ़ैलने से रोका जा सकता है. इसलिए शुरुआती तौर पर इस खोज को महज़ एक दुर्घटना कहा जा सकता है.

इसमें खास क्या है?


दरअसल WannaCry सिर्फ एक रैंसमवेयर प्रोग्राम नहीं है, बल्कि यह एक Worm (कीड़ा) है. वर्म से मतलब है कि ये आपके कम्प्यूटर में प्रवेश करने के बाद बाकी दूसरे कंप्यूटर्स में भी प्रवेश करने की कोशिश करता है. यह जहां तक संभव हो सके, वहां तक अपने आप को फ़ैलाने की कोशिश करता है.
रैंसमवेयर कई प्रकार से काम करता है. अगर रैंसमवेयर आपके कम्प्यूटर में एक्ज़ीक्यूट हो गया तो एक झटके में आपका पूरा कम्प्यूटर लॉक हो जाता है, स्क्रीन पर केवल एक मेसेज दिखाई देता है- 'सिस्टम को लॉगइन करने के लिए पेमेंट करें'. कुछ परिस्थितियों में आपके सामने पॉप अप्स बन कर आते हैं. इन पॉप अप्स को बंद करना कठिन या फिर नामुमकिन होता है, जिसके चलते सिस्टम को इस्तेमाल करना भी लगभग नामुमकिन हो जाता है.

इसके पीछे कौन है?


माना जा रहा है कि अमेरिका की नेशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी(NSA) जिस तकनीक का इस्तेमाल करती थी, वह इंटरनेट पर लीक हो गई और हैकर्स ने उसी तकनीक का इस्तेमाल किया है.
एनएसए (NSA) और सीआईए में काम कर चुके व्हिसलब्लोअर, एडवर्ड स्नोडन ने इस ग्लोबल साइबर अटैक के लिए एनएसए को ही ज़िम्मेदार ठहराया है. माइक्रोसॉफ़्ट ने भी एक बयान जारी कर कंप्यूटर सिस्टम में सुरक्षा से जुड़ी जानकारी रखने के सरकार के तरीके की आलोचना की.

रैंसमवेयर का अटैक होने पर आप क्‍या करें?


सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक रैंसमवेयर कोई नयी चीज नहीं है और इससे पहले भी ब्रिटेन में इसका हमला हो चुका है. लेकिन इसे लेकर सावधानी ज़रूर बरती जा सकती है.
अगर आप पुराने विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे XP, 8 या विस्टा का उपयोग कर रहे हैं, तो उसे अपडेट कर लें. माइक्रोसाफ्ट ने इस खतरे को देखते हुए दुनिया भर में विशेष सिक्योरिटी पैच जारी किए हैं.
किसी भी तरह के मेल के साथ आने वाले Rar, Zip या इस तरह के कंप्रेस फ़ाइल को खोलने से पहले सुनिश्चित कर लें कि यह सही हैं. लॉटरी से संबंधित मेल या अंजाने मेल को खोलने की कोशिश न करें. अपने सिस्टम में एंटी वायरस और एंटी मालवेयर को अपडेटेड रखें. 

Source: TOI

Tuesday, 9 May 2017

मंदिरा बेदी की Pregnancy के वक़्त की और अब की तस्वीर आपको जिम-योगा-रनिंग, सब करने पर मजबूर कर देंगी

हम अपने बढ़ते वज़न से अकसर परेशान रहते हैं. हां, हम इसे स्वीकार नहीं करते, Unique बनने की होड़ है, तो कुबूल करना भी मुश्किल हो जाता है. हकीकत तो यही है कि कहीं से भी बढ़ना, कभी न कभी हमारी चिंता का विषय बन ही जाता है. ऐसे समय पर हम Celebrities की तरफ़ रुख करते हैं.
मंदीरा बेदी, वही दिलवाले दुल्हनिया वाली, वही शांति वाली, वही क्रिकेट वर्ल्ड कप की एंकर. उनकी एंकरिंग ने क्रिकेट और एंकरिंग, दोनों ही शौक़ को हवा दी थी.
मंदिरा ने 2011 में अपने बेटे वीर को जन्म दिया. पति राज कौशल के साथ वीर उनकी पहली संतान है.
हाल ही में, मंदीरा ने Instagram पर अपनी गर्भावस्था की और अब की तस्वीर साझा की. इन दोनों तस्वीरों ने हमारी बोलती बंद कर दी है.

सवाल वही है, कोई इतना Fit कैसे हो सकता है, वो भी मां बनने के बाद?
मां बनने के बाद वज़न कम करना बहुत मुश्किल हो जाता है. पर मंदिरा के Figure को देखकर यकीन नहीं होता.
अपने Fit Figure से मंदिरा ने कई बार हमें चौंकाने के साथ-साथ प्रेरित भी किया है.
याद है दूरदर्शन की 'शांति'?

मंदिरा की तस्वीर मुझे भी Exercise करने के लिए प्रेरित कर रही है

वीर को भी अपनी मम्मी पर गर्व होगा

मंदीरा जी, आखिर कैसे? हमसे तो Pizza ही नहीं छूट रहा

आप हम सब के लिए एक मिसाल हो.

कोई भी मुश्किल आपको रोक नहीं सकती

हर मुसीबत का करती हैं डट कर सामना.

क्या ये मुमकिन है?

हमें आपसे ज़रा सी जलन भी हो गई

मंदिरा आपके लिए Dictionary में भी शब्द नहीं है.

मंदिरा इस बात का सुबूत हैं कि दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है. मंदिरा के हौसले और जज़्बे से हम सभी को सीख लेनी चाहिए.