Friday, 14 August 2015

1400 बच्चों की मां बन कर सिंधुताई ने की एक मिसाल कायम

1400 बच्चों की मां सिंधुताई का जीवन बड़ा उतार-चड़ाव भरा रहा है. इस 68 वर्ष की महिला के भीतर कई कहानियां छिपी हुई हैं. सिंधुताई की फुर्ती देख कर आपके लिए यह अंदाज़ा लगा पाना थोड़ा मुश्किल होगा कि वो बुजुर्ग हैं. लोग प्यार से उन्हें ‘अनाथों की मां’ कहते हैं. सिंधुताई का जन्म पूर्वी महाराष्ट्र के नवरगांव के एक गरीब चरवाहा परिवार में हुआ था. उन्होंने सिर्फ़ कक्षा चार तक ही शिक्षा प्राप्त की है. 
सिंधुताई सपकाल की जिंदगी एक ऐसे बच्चे के तौर पर शुरू हुई थी, जिसकी ज़रूरत किसी को नहीं थी. उनकी शादी 10 वर्ष की अल्प आयु में 30 वर्ष के युवक के साथ कर दी गई थी. जब उनके पेट में नौ महीने का गर्भ था तब उनका पति उन्हें छोड़ कर चला गया. शायद यही कारण था कि उन्हें अपनी बच्ची को एक गौशाला में जन्म देना पड़ा और गर्भनाल भी खुद ही काटनी पड़ी. इतना कुछ होने के बाद भी सिंधुताई ने हार नहीं मानी बल्कि वो और मजबूत होती गईं. आज वो कई लोगों को प्रेरणा देती हैं. 
सिंधुताई अपनी बेटी के साथ रेलवे स्टेशन पर भीख मांग कर गुज़र-बसर करने लगी थी. भीख मांगने के दौरान वह ऐसे कई बच्चों से मिली जिनका कोई नहीं था. उन बच्चों में उन्हें अपना दुख नज़र आया और उन्होंने सभी को गोद ले लिया. इसके बाद उन्हें जो भी अनाथ बच्चा मिलता वह उसे अपना लेतीं. अब-तक वो 1400 से अधिक बच्चों को अपना चुकी हैं. वे उन्हें पढ़ाती है, उनकी शादी करती हैं और ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू करने में मदद करती हैं. ये सभी बच्चे उन्हें माई कह कर पुकारते हैं. बच्चों में भेदभाव न हो जाए इसलिए उन्होंने अपनी बेटी किसी और को दे दी. आज उनकी बेटी बड़ी हो चुकी है और वह भी एक अनाथालय चलाती है. 
सिंधुताई का परिवार बेहद बड़ा है. उनके 207 जमाई, 36 बहुएं और 1000 से अधिक पोते-पोतियां हैं. आज भी वो अपने काम को बिना रुके करती जा रही हैं. वह किसी से मदद नहीं लेती बल्कि खुद भाषण देकर पैसा जमा करने की कोशिश करती हैं. उनके इस काम के लिए उन्हें 500 से अधिक सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है. उनके नाम पर 6 संस्थाएं चलती हैं जो अनाथ बच्चों की मदद करती हैं. 

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