Wednesday, 29 July 2015

जेम्स गिल्लिंघम के आविष्कार ने दिखाई हज़ारों को फिर से ज़िन्दगी जीने की राह

ये बात है 1866 की जब मेडिकल विज्ञान ने इतनी तरक्की नहीं की थी. इंग्लैंड में युद्ध और पोलियो जैसी बीमारियां जनता को जकड़े हुए थीं. इसी बीच एक साधारण से मोची ने ऐसा आविष्कार किया जिसने हज़ारों लोगों की ज़िन्दगी बदल दी.
ये इंसान है जेम्स गिल्लिंघम जो इंग्लैंड में जूते बनाने का व्यवसाय करते थे. 1866 में एक आदमी उनके पास आया जिसने अपना हाथ तोप की दुर्घटना में खो दिया था और डॉक्टरों ने उसे कह दिया था कि अब कुछ नहीं हो सकता.
अपनी कारीगरी और शिल्पकारिता को कसौटी पर रखते हुए, जेम्स ने उस आदमी के लिए मुफ़्त में कृत्रिम हाथ बनाने की इच्छा जताई.
उन्होंने चमड़े से नया हाथ बनाया जो सिर्फ़ मज़बूत और सुदृढ़ ही नहीं, उचित रूप से फिट भी होता था. जल्द ही मेडिकल दुनिया ने उनके इस टैलेंट को पहचानना शुरू किया और गिल्लिंघम ने अलग-अलग तरह के कृत्रिम अंग बनाने शुरू किये.

एक गोपनीय तकनीक का इस्तेमाल करके जेम्स चमड़े को मरीज़ के अंग के अनुरूप ढालते और फिर उसे सख़्त करते. अपने कार्य में निपुण हो जाने के बाद उन्होंने इस ही काम को अपना व्यवसाय बना लिया.
1910 तक जेम्स गिल्लिंघम ने 15,000 मरीज़ों को चलने-फिरने और अपना जीवन आज़ादी से जीने की राह दिखा दी थी. उन्होंने अपने मरीज़ों की कई तस्वीरें भी ली थीं जिससे मेडिकल सर्जन्स को कृत्रिम अंग लगाने में मदद मिल सके.
गिल्लिंघम की मृत्यु 1924 में हो गयी, लेकिन उनके परिवार ने इस व्यवसाय को 1960 तक जारी रखा. हम आपको दिखाते हैं जेम्स गिल्लिंघम द्वारा बनाये गए कुछ कृत्रिम अंगों की तस्वीरें.

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