Monday, 27 October 2014

क्या वजह है जो टूटे शीशे को अशुभ माना जाता है… जानिए प्रचलित अंधविश्वासों के पीछे छिपे कारणों को

काली बिल्ली द्वारा रास्ता काटने पर आप भले अपना रास्ता न बदलते हों पर आप ऐसे कई लोगों से जरूर मिले होंगे जिनका बिल्ली अगर रास्ता काट ले तो चेहरे का रंग उड़ जाता है. आप ऐसे लोगों को भी जरूर जानते होंगे जिन्हे घर से निकलते वक्त अगर छींक आ जाए तो वह अपनी अपनी योजना ही बदल लेते हैं.  इसमें कोई दो राय नहीं की ये हरकतें अंधविश्वास के सिवाय और कुछ नहीं, पर क्या आपने कभी सोचा है कि इन अंधविश्वासों का जन्म कहां से हुआ है? इनका इतिहास क्या है? औऱ इनके पीछे कौन से मनोवैज्ञानिक कारण काम करते हैं?
सभ्यता के प्रारंभ में मनुष्य ने उन चीजों को भी समझने का प्रयत्न किया है जो उसके ज्ञान से परे थी, उसने बीमारी, पागलपन, मृत्यु, सूखा, बाढ़, भूकंप आदि के पीछे तर्क खोजने की कोशिश की. पर विज्ञान की समझ न होने की वजह से उसने हर चीज को अलौकिक शक्तियों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया,  उसने उदार भगवान और खतरनाक शैतान की छवि गढ़ी. फिर भगवान को शैतान की तुलना में ताकतवर करने के लिए कर्मकांड बनाए.


आज बहुत से अंधविश्वासों की उत्पत्ति के बारे में हम नहीं जानते लेकिन जिनके बारे में जानते हैं उनसे अंधविश्वासों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है. माना जाता है कि टूटा शीशा दुर्भाग्य लाता है और इसकी उत्पत्ति इस प्राचीन विश्वास से हुई है कि पानी में मनुष्य की परछाई दरअसल उसकी आत्मा को दर्शाती है और पानी में उत्पन्न होने वाली लहर उसे नष्ट कर देती है.

छींक को भी अशुभ मानने के पीछे यही कारण है. प्रारंभिक मनुष्य यह मानता था कि सांस आत्मा की प्रतिनिधि होती है. सांस के भीतर जाने का अर्थ जीवन का भीतर जाना माना जाता था पर छींक के साथ जब अचानक सांस बाहर आती तो उसे बेहद अशुभ समझा जाता. ऐसा माना जाता था कि छींकने वाले व्यक्ति की मृत्यु नजदीक है. छींकने पर दुआ देने की परंपरा के पीछे भी यही मान्यता है.




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