फिल्मों में महिलाओं को सिर्फ ‘सेक्स ऑब्जेक्ट’ के तौर पर देखे जाने के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए बॉलिवुड में लड़कियों को एंट्री लेने के लिए कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसा भी नहीं है कि यह कोई आज की बात है, बल्कि आज से 60 साल पहले भी ऐसा ही होता था।
50 और 60 के दशक में भी कई लड़कियां फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने के लिए यहां पहुंचती थीं लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं था, जितना लोग समझते थे।
50 और 60 के दशक में भी कई लड़कियां फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने के लिए यहां पहुंचती थीं लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं था, जितना लोग समझते थे।
यकीन नहीं होता तो हम आपको दिखाते हैं 1951 की कुछ ऐसी ही अनदेखी तस्वीरों को, जो बॉलिवुड ऑडिशन की सच्चाई बयां करती हैं।
ये तस्वीरें Life Magazine के फोटो जर्नलिस्ट ‘जेम्स बुरके’ ने तब खींची थीं, जब डायरेक्टर अब्दुल राशिद करदार अपनी फिल्म के लिए एक भारतीय और एक विदेशी लड़की का ऑडिशन ले रहे थे।
यहां बता दें कि राशिद ने शाहजहां (1946), दिल्लगी (1949), दुलारी (1949) और दिल दिया दर्द लिया (1966) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया था।
No comments:
Post a Comment